जानिए हमारे देश में दी जाने वाली स्कूली शिक्षा का हाल - क्या विद्यार्थियों का सचमुच हो रहा है सर्वांगीण विकास 

Know the condition of school education given in our country - Are students really getting all round development?
 
 

शिक्षा - शिक्षा का अर्थ है सर्वांगीण विकास, सर्वांगीण विकास से मेरा अभिप्राय है बच्चे का मानसिक विकास शारीरिक विकास बौद्धिक विकास विचारों का विकास व व्यक्तित्व विकास जैसे सभी आयाम सर्वांगीण विकास का हिस्सा है।  तो क्या हमारे विद्यालयों में ऐसी शिक्षा दी जा रही है जिसमें एक बच्चे का सर्वांगीण विकास होता है आईए जानते हैं इस खबर में।

हमारे विद्यालयों में लगभग आजादी के बाद से लेकर अब तक 70 से 75 वर्षों के इस समय अंतराल में शिक्षा के सत्र में काफी सुधार आए हैं लेकिन आज भी एक विषय चिंता का है वह विषय है कि क्या 12वीं कक्षा पास करने के बाद हमारे विद्यालय से बाहर जाने वाला बच्चा 500 से 1000 रुपए भी कमाने में सक्षम है और इसका जवाब कहीं ना कहीं है - नहीं।

 इसका कारण है बच्चों में स्किल की कमी होना, बच्चों ने स्कूल में गणित , विज्ञान , सामाजिक विज्ञान , भूगोल और यहां तक की इकोनॉमिक्स जैसे विषयों की पढ़ाई भी की है लेकिन अभी तक भी हमारे विद्यालयों में रट्टा मार कर पढ़ाई करने की पद्धति चली आ रही है जिसके चलते एक बच्चे में स्किल का डेवलपमेंट होना अभी बाकी है । उदाहरण के लिए अगर बताना चाहें , अगर किसी बच्चे ने साइंस की पढ़ाई की है और साइंस में इलेक्ट्रॉनिक जैसे विषय भी पढ़ाए जाते हैं और बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स या इलेक्ट्रिकल्स में करने के बाद भी एक बच्चे को अपने घर में बिजली से संबंधित समस्या को ठीक करवाने के लिए बाहर से बिजली के मिस्त्री को बुलाना पड़ता है इससे यह बात का पता चलता है कि बच्चों में जो विषय उसने पढ़ा है उससे संबंधित स्किल की कमी है। ठीक उसी प्रकार हमारे घरों में कोई भी छोटी से छोटी जो समस्या है चाहे किसी पंखे की तार का खराब हो जाना या कोई बिजली की मोटर का खराब हो जाना या किसी पानी के नल में से पानी का लीक होना यह सब वह छोटी-छोटी समस्याएं हैं जिसके लिए हमें हर रोज अपने घर में मिस्त्री की जरूरत पड़ती है इससे इस बात का पता चलता है कि हमारे शिक्षा के सिस्टम में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे हम रोजमर्रा के स्किल को अपने अंदर धारण कर सकें ‌। तो क्या इसका मतलब है कि हमारी स्कूली शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है और अगर इसका उत्तर है हां तो क्या इसे पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए या इसमें बदलाव की जरूरत है तो मुझे लगता है कि हमारे स्कूल कि शिक्षा व्यवस्था में एक अच्छे और नए बदलाव की जरूरत है 21वीं शताब्दी के इस समय में जब स्कूलों में वही पुरानी शिक्षा व्यवस्था जिसमें आर्ट्स, कॉमर्स, साइंस इन सभी स्ट्रीम को पढ़ाया जाता है वहीं इसके साथ-साथ जिन चीजों की जरूरत है जैसे कि कंप्यूटर की शिक्षा - कंप्यूटर की शिक्षा कहने को तो कुछ सालों से हमारी शिक्षा व्यवस्था में है लेकिन इसमें बच्चों को एमएस वर्ड, पावर पॉइंट और एक्सेल जैसे विषय पर पकड़ मजबूत नहीं है। इसलिए इस बात की जरूरत है कि बच्चों को स्कूल में कंप्यूटर की अच्छी शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए जहां पर बच्चे एमएस वर्ड पावरप्वाइंट तथा एक्सेल जैसे विषय में एक्सपर्टीज हासिल कर सके ताकि एक्सेल जैसा विषय जब बच्चा किसी भी व्यवसाय में जाता है तो उसके बहुत काम आता है जैसे कि अगर एक बच्चा कल को अध्यापक बनता है तो उसको अपने क्लास के विद्यार्थियों की पूरी जानकारी एक्सेल में डालकर उसे आसानी से पूरे साल भर प्रयोग में लाया जा सकता है। ठीक इसी प्रकार आज के नए समय में कुछ और विषयों की भी जरूरत है जिसमें सबसे ऊपर माने जा सकते हैं कोडिंग , आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , व रोबोटिक्स। हालांकि नई राष्ट्रीय एजुकेशन पॉलिसी 2020 में इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था से संबंधित कुछ बातें हैं लेकिन अभी भी इस पॉलिसी को पूरी तरह से लागू होने में कुछ सालों का समय लगेगा इसलिए हमारे विद्यालयों को चाहिए कि वह अपने स्तर पर इन सभी विषयों को पढ़ने के लिए कुछ व्यवस्था करें ताकि जब हमारे विद्यार्थी कक्षा 12वीं पास करके हमारे विद्यालय से बाहर जाएं तब वह स्किल्ड बच्चे हो और वह अपने जीवन यापन की कमाई खुद कर सके यह कहीं ना कहीं हमारे शिक्षा व्यवस्था का एक मोटो होना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्यरत रहेंगे।