दुनिया की पांच सबसे खौफनाक सड़कें

 

जोजी ला पास (भारत)
भारत के जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थित यह सड़क लद्दाख को श्रीनगर से जोड़ती है। यह 3,528 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और 9 किलोमीटर लंबी है। जोजी ला पास पर सफर करना बहुत ही खतरनाक होता है, खासकर तेज हवाओं और बर्फबारी के दौरान। यह मार्ग बर्फीले तूफानों और तेज हवाओं के कारण काफ़ी खतरे में रहता है, जिससे यहां ड्राइविंग एक बड़ी चुनौती बन जाती है।

जलालाबाद से काबुल (अफगानिस्तान)
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से जलालाबाद जाने वाली सड़क 143 किलोमीटर लंबी है और इसमें तीव्र मोड़ और संकरे रास्ते हैं। इस मार्ग पर अक्सर हादसों की खबरें आती हैं, खासकर ओवरटेक करते समय। यह सड़क काबुल और जलालाबाद के बीच एकमात्र कनेक्शन है, लेकिन इसके खतरनाक मोड़ और ऊंची चट्टानें इसे एक खतरनाक मार्ग बना देती हैं।

बयबर्ट डी915 (तुर्की)
तुर्की के ट्राब्जोन क्षेत्र में स्थित यह सड़क दुनिया की सबसे खतरनाक सड़कों में से एक मानी जाती है। इस मार्ग पर एक ओर ऊंचे पहाड़ हैं और दूसरी ओर खाई, जिससे ड्राइविंग करना बहुत जोखिम भरा होता है। यहां की संकरी और खड़ी सड़कों पर हादसों का होना आम बात है। यह मार्ग 1916 में रूसी सैनिकों द्वारा सोगनली पर्वत के किनारे बनाया गया था।

लक्सर-हुर्घदा सड़क (मिस्र)
मिस्र में लक्सर और हुर्घदा के बीच की यह सड़क 299 किलोमीटर लंबी है और इसके कारण इसका नाम डरावनी सड़कों में लिया जाता है। हालांकि यहां कोई प्राकृतिक खतरनाक स्थितियां नहीं हैं, लेकिन इस मार्ग पर डकैतों और आतंकवादी गतिविधियों के कारण यह खतरनाक मानी जाती है। यहां के अपहरण और लूटपाट की घटनाएं लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

द डेथ रोड (बोलिविया)
बोलिविया में स्थित इस रोड को 'द डेथ रोड' कहा जाता है और इसके नाम से ही यह साफ है कि यह कितनी खतरनाक होगी। इस 64 किलोमीटर लंबी सड़क पर हर साल 200-300 मौतें होती हैं। यह सड़क बेहद संकरी है, जहां दो गाड़ियां एक साथ नहीं चल सकतीं। गाड़ी फिसलने और खाई में गिरने के खतरे के कारण यहां ड्राइविंग करना बेहद खतरनाक होता है। इस सड़क पर साइक्लिस्टों के बीच यह एक एडवेंचर की तरह देखा जाता है।

भगवान रामलला अयोध्या की ये 10 बातें

राम मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था, और यह स्थल हिन्दू धर्म के लिए अत्यंत पवित्र है। राम मंदिर की पौराणिक मान्यता हजारों साल पुरानी है, और यह स्थल भारत की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।

अयोध्या की भव्यता
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, अयोध्या नगरी अत्यंत भव्य थी, जिसमें लंबी और चौड़ी सड़कों के साथ सुंदर महल और बगीचे थे। इसे इन्द्र की अमरावती से भी सुंदर माना गया था।

कौशांबी के महाराज कुश द्वारा पुनर्निर्माण
भगवान राम के बैकुंठ धाम जाने के बाद अयोध्या की नगरी का पुनर्निर्माण कौशांबी के महाराज कुश द्वारा किया गया था, जैसा कि कालिदास के रघुवंश में वर्णित है।

राम मंदिर का निर्माण
राम जन्मभूमि पर पहला मंदिर पत्थरों के खंभों वाला था, जिसे भगवान राम के पिता दशरथ द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर बाद में मुस्लिम आक्रमणों द्वारा ढहा दिया गया।

बाबर द्वारा मस्जिद निर्माण
1528 में बाबर द्वारा अयोध्या में मस्जिद का निर्माण किया गया था, जिसका विवाद वर्षों तक चला।

1859 में विवादित स्थल पर यथास्थिति
1859 में अंग्रेजों ने विवाद को शांत करने के लिए अयोध्या में हिंदुओं और मुसलमानों को अपने-अपने स्थान पर पूजा करने की अनुमति दी थी।

रामलला की अस्थाई टेंट में पूजा
1992 में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद, रामलला को अस्थाई टेंट में स्थापित किया गया, जहां वे पूजा करते रहे।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया और मुस्लिम समुदाय को मस्जिद निर्माण के लिए अलग भूमि दी।

5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन
5 अगस्त 2020 को श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया, जिससे लाखों हिन्दू भक्तों की आस्था को मान्यता मिली।

राम मंदिर का निर्माण प्रगति पर
अब राम मंदिर निर्माण का कार्य तेज गति से चल रहा है, और इसे भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के रूप में देखा जा रहा है।