OP Chautala Funeral: बेटे Ajay और Abhay Chautala में से किसने दी ओपी चौटाला को मुखाग्नि! | Haryana

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OP Chautala Funeral:

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला पंचतत्व में विलीन

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता ओम प्रकाश चौटाला का निधन हो गया। गुरुग्राम के एक अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। ओम प्रकाश चौटाला का हरियाणा की राजनीति में योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

चौटाला गांव में हुआ अंतिम संस्कार

शनिवार सुबह 8 बजे ओपी चौटाला का पार्थिव शरीर उनके चौटाला गांव स्थित फार्म हाउस पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। हजारों की संख्या में लोग जनप्रिय और किसान नेता को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शाम को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटा गया और उन्हें हरी पगड़ी व चश्मा पहनाया गया।

परिवार के बीच दिखी एकजुटता

ओम प्रकाश चौटाला के अंतिम संस्कार में उनके परिवार के सभी सदस्य एकजुट नजर आए। उनके दोनों बेटे, अभय चौटाला और अजय चौटाला, मुखाग्नि देने में शामिल रहे। अभय चौटाला अपने पिता के बेहद करीब थे, और उनके चेहरे पर गहरा दुख साफ झलक रहा था। वहीं, अजय चौटाला भी अपने पिता के जाने से बेहद व्यथित दिखे।

देशभर से पहुंचे बड़े नेता

ओम प्रकाश चौटाला को श्रद्धांजलि देने के लिए देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई बड़े नेता पहुंचे। धनखड़ ने चौटाला के संघर्ष और ग्रामीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "चौटाला जी ने हमेशा किसान हित और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी। उनका जीवन और संघर्ष देश के लिए प्रेरणादायक है।"

हरियाणा में नई बहस शुरू

ओपी चौटाला के निधन के साथ ही हरियाणा की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। उनके परिवार में नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभय चौटाला और अजय चौटाला के बीच कौन आगे बढ़ेगा, यह देखने वाली बात होगी।

परिवार ने व्यक्त किया शोक

अभय चौटाला ने सोशल मीडिया पर पिता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए लिखा, "पिताजी का निधन सिर्फ हमारे परिवार की नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षति है, जिनके लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका संघर्ष, उनके आदर्श, और उनके विचार हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।"

हरियाणा की राजनीति को मिली बड़ी क्षति

ओम प्रकाश चौटाला का जाना हरियाणा की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। वे पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे और अपनी स्पष्टवादिता और निर्भीकता के लिए जाने जाते थे। चौटाला जी की विरासत हरियाणा के लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी।