अग्रवाल समाज की नाराजगी के चलते सट्टा बाजार मे धराशाई हुए कांडा,गोकुल को गांवों मे मिल रहा भारी समर्थन 

Kanda and Gokul are getting huge support in the villages due to the displeasure of the Agrawal community which collapsed in the betting market.

 
SIRSA ELECTIONS 

- ग= गोपाल:: ग= गोकुल

= किसकी कुंडली में राजयोग?

नगरयात्रा न्यूज, सिरसा। सिरसा विधानसभा सीट को लेकर चुनावी घमासान के बीच लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर सिरसा से कौन विजय हासिल करेगा? मुख्य मुकाबला हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा और कांग्रेस प्रत्याशी गोकुल सेतिया के बीच होना तय है। पिछली बार 2019 में भी दोनों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था, जिसमें गोपाल कांडा विजयी रहे थे।

              दोनों ही प्रत्याशियों के नाम '' से शुरू होते है। चूंकि सिरसा में बागेश्वर सरकार की हनुमंत कथा को लेकर चर्चाओं का दौर बना हुआ है। ऐसे में लोग यह कयास लगा रहे है कि आखिर दोनों में से किसकी कुंडली में राजयोग बना हुआ है। सिरसा सीट पर भले ही अन्य उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में है लेकिन ग अक्षर से शुरू होने वाले उम्मीदवारों के बीच ही असल जंग है।

              चुनावी चर्चाओं के बीच मतदाता दोनों उम्मीदवारों को तौलने में जुटा है। समर्थकों के अपने-अपने दावे है। लेकिन मतदाताओं ने चुप्पी साध रखी है। शुरूआती दौर में गोकुल हावी बने हुए थे लेकिन समय के साथ-साथ गोपाल का भी ग्राफ बढ़ा। इन चुनाव में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला बना हुआ है। गोकुल को कांग्रेस का साथ मिला है। कांग्रेस के पक्ष में बनी लहर का सीधा लाभ उन्हें मिलता दिखाई दे रहा है।

              जबकि गोपाल कांडा को एंटी इंकमबेंसी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। भाजपा-जजपा सरकार की नीतियों से पब्लिक को हुई परेशानी का ठीकरा उनके सिर फूट रहा है। लोगों में नाराजगी है। इसके साथ ही उनका अपने विधानसभा क्षेत्र से नदारद रहना भी लोगों की नाराजगी का मुख्य कारण बना हुआ है।

              सिरसा के विधायक के नाते नगर परिषद सिरसा में हुए घपले-घोटालों पर उनकी चुप्पी भी उन्हें नुकसान पहुंचा रही है। लोगों में नगर परिषद के खिलाफ गुस्सा है, चूंकि नगर परिषद में हलोपा की चेयरपर्सन रीना सेठी के कार्यकाल में ही करोड़ों की ग्रांट जारी की गई। करोड़ों की खरीद और स्टार्म वॉटर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई।

              इन चुनाव में गोपाल कांडा को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि गोकुल को हर वर्ग का समर्थन प्राप्त हो रहा है।

अग्रवाल समाज की नाराजगी के चलते सट्टा बाजार मे धराशाई हुए कांडा ।

गोकुल के भाव 28 पैसे और 16500 वोटो से जीत दिखा रहा सट्टा बाजार।

सिरसा। सिरसा विधान सभा क्षेत्र से मुख्य रूप से अरोड़ा और अग्रवाल समाज मे से किसी एक का विधायक बनता रहा है। एक ओर जहां लक्ष्मण दास अरोड़ा ने पांच बार अपने समाज को साथ रखकर विधान सभा चुनाव मे जीत हासिल कर सिरसा विधान सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वहीं 2009 के बाद तीन विधान सभा चुनावो मे अग्रवाल समाज का विधायक बना। 2009 और 2019 मे अग्रवाल और ब्राह्मण समाज समाज ने गोपाल कांडा को विजयी बनाने मे अहम् योगदान दिया। 2014 मे इनेलो के मक्खन सिंगला से कडे मुकाबले मे गोपाल कांडा को हार का सामना करना पड़ा। इन तीनो चुनावो मे गोपाल कांडा सट्टा बाजार के फेवरेट उम्मीदवार रहे। परंतु इस बार विधायक जी 8-अक्तुबर को आने वाले चुनाव परिणाम से पहले ही अपनी हार को स्पष्ट देख रहे। उनको जिताने का सट्टा लगाने वाले को एक रूपय के चार रूपय मिल रहे है। 2009 के बाद पहली बार हलोपा सुप्रीमो अग्रवाल समाज की भारी नाराजगी कीमत चुका रहे है। वैश्य समुदाय के सिरसा विधान सभा क्षेत्र मे 33 हजार वोट है। परंतु विधायक जी ने खजांचियो वाली गली के पांच परिवारो को ही संपूर्ण अग्रवाल समाज समझने की भूल कर दी।   जिसके कारण जागरुक अग्रवाल समाज ने कांडा बंधुओ को सबक सिखाने का मन बना लिया और गोकुल सेतिया को एक बार मौका देने का मन बना लिया। वैसे भी गोपाल कांडा दीपावली पर्व, होली , रझा बंधन और शिवरात्री पर ही सिरसा आते है और इन पांच अग्रवाल परिवारो के अलावा किसी अन्य अग्रवाल को राम-राम का जबाव देने मे शर्म आती थी। अग्रवाल समुदाय के अनेक गणमान्य लोगो ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस बार कांडा बंधुओ को राजनीति से विदाई देकर एक बार नौजवान गोकुल को मौका देकर देखेंगे। फिलहाल सट्टा बाजार ने कांडा की राजनीति के जादूगर की छवी पर कालीख पोत दी है।

SOURCES - नगर यात्रा (NEWS PAPER)