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Haryana News: हरियाणा की इस जगह स्थित है भगवान शिव का चमत्कारी मंदिर, एक बार माथा रखने से पूरी होती है सभी मनोकामनाएं

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नई दिल्ली, Haryana News :- 8 मार्च को महाशिवरात्रि आने वाली है. महादेव के भगत अभी से शिवरात्रि की तैयारी में लग गए हैं. कहा जाता है कि फागुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव तथा मां पार्वती की शादी हुई थी. अतः हर वर्ष फागुन माह की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. इस दिन शिव जी के मंदिरों में काफी भीड़ देखने को मिलती है. हरियाणा में भी शिव जी के कुछ विशेष मंदिर है जिनका रहस्य तथा प्राचीन कथाएं शिव भक्तों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है. तो चलिए आज आपको इन मंदिरो की विशेषताएं बताते है.


संगमेश्वर महादेव मंदिर

संगमेश्वर महादेव मंदिर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा के अरूणाई गांव में स्थित है. इस मंदिर की मान्यता है कि यहां नाग देवता शिव भक्तों के दर्शन के लिए हर वर्ष आते हैं. यह अरुणा तथा सरस्वती नदी के संगम का स्थान है. पुराणो के अनुसार महर्षि वशिष्ठ तथा विश्वामित्र ऋषि ने यहां तप किया था. मान्यता है कि विश्वामित्र ने एक बार सरस्वती को खून से बहने का श्राप दे दिया था, परंतु बाद में महर्षि वशिष्ठ ने सरस्वती को यहां प्रकट हुए शिवलिंग की पूजा अर्चना करने के लिए कहा. ऐसा करने से सरस्वती पाप से मुक्त होकर फिर से शुद्ध जलधारा से बहने लगी.


11 रूद्री शिव मंदिर

श्री 11 रूद्री शिव मंदिर हरियाणा के कैथल में स्थित है. मंदिरो की अधिकता के कारण कैथल को छोटी काशी भी कहा जाता है. कैथल के इस मंदिर का इतिहास महाभारत के युद्ध से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद कृष्णा ने कोरवों और पांडवों के बीच हुए युद्ध में मारे गए सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी. भगवान शिव ने इसी स्थान पर प्रसन्न होकर अर्जुन को दर्शन दिए थे.


आदि बद्री केदारनाथ
यमुनानगर से लगभग 47 किलोमीटर दूर आदि बद्री केदारनाथ मंदिर स्थित है. इस मंदिर में स्वयंभू भगवान की शिवलिंग है. यह मंदिर सोम नदी के दूसरे छोर पर स्थापित है. इस मंदिर में 21 दिन पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. पुराणों में भी इस मंदिर का जिक्र मिलता है.


कालेश्वर महादेव मंदिर
कुरुक्षेत्र में ही भगवान कालेश्वर महादेव मंदिर स्थित है. इस मंदिर की मान्यता है कि जब आकाश मार्ग से लंकापति रावण का पुष्पक विमान गुजर रहा था तो मंदिर के ऊपर आते ही वह डगमगा गया था. उसके पश्चात रावण ने यहां शिवजी की पूजा की थी. इसके बाद महादेव ने प्रसन्न होकर रावण को अपने दर्शन भी दिए थे. इसी स्थान पर रावण ने भगवान शिव से काल पर विजय का वरदान मांगा था और साथ ही कहा था कि इस मनोकामना का साक्षी कोई तीसरा न हो. भगवान शिव ने इसी समय नंदी महाराज को अपने से दूर कर दिया था. यही कारण है कि यह पहला शिवलिंग है जो बिना नंदी के स्थापित है.
 

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