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कभी घर-घर जाकर पेचकश लेकर डिश कनैक्शन लगाते थे मुख्यमंत्री सैनी, ये है पूरी कहानी

कभी घर-घर जाकर पेचकश लेकर डिश कनैक्शन लगाते थे मुख्यमंत्री सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जीवन संघर्ष और कड़ी मेहनत की मिसाल है। वे आज प्रदेश के 11वें मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुत साधारण थी। एक समय था जब वे नारायणगढ़ में घर-घर जाकर डिश कनेक्शन लगाते थे। हाथ में पेचकश और पलाश लेकर सुबह से शाम तक काम करने वाले नायब सिंह सैनी का यह संघर्ष ही उन्हें आज की राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले आया।

1. साधारण शुरुआत से राजनीति तक का सफर
नायब सिंह सैनी का जन्म 25 जनवरी 1970 को अंबाला जिले के मिर्जापुर माजरा में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त की और बाद में ग्रेजुएशन और एलएल.बी की डिग्री हासिल की। एक समय था जब उन्होंने नारायणगढ़ में केबल का कारोबार भी किया। उनके जीवन के पहले साल संघर्ष से भरे हुए थे, जब वे घर-घर जाकर डिश कनेक्शन लगाते थे। यह उनका व्यावासिक जीवन था, और राजनीति में कदम रखने से पहले वे ऐसे साधारण कार्य करते थे।

2. राजनीतिक सफर की शुरुआत
नायब सिंह सैनी ने 1996 में राजनीति में कदम रखा था। उस समय वे भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) के सहयोगी के रूप में काम कर रहे थे। उनकी राजनीति की शुरुआत युवा मोर्चा से हुई थी, जहां वे अंबाला इकाई के अध्यक्ष बने। इसके बाद उन्होंने युवा मोर्चा के महासचिव, किसान मोर्चा के महासचिव, और जिला अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

सैनी का राजनीति में योगदान और उनकी मेहनत ने उन्हें पार्टी में उच्च स्थान दिलाया। वे भारतीय जनता पार्टी के एक अहम नेता बन गए और पार्टी के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए।

3. मुख्यमंत्री बनने की यात्रा
नायब सिंह सैनी हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने वाले दूसरे नेता हैं, जो पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। इससे पहले राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे थे, जो अहीर समुदाय से आते थे। सैनी ने मई 2019 में भाजपा की टिकट पर संसदीय चुनाव में भाग लिया और कांग्रेस के निर्मल सिंह को बड़े अंतर से हराया। इसके बाद, उनके नाम की चर्चा तेज हुई, और वे हरियाणा के मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बने।

मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल:
मनोहर लाल खट्टर के बाद, सैनी ने 2014 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अपना कार्यकाल शुरू किया। उनका कार्यकाल 9 साल और 138 दिन रहा। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा रही कि भाजपा ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए मुख्यमंत्री पद पर बड़ा बदलाव किया।

4. सियासी समीकरण और जातीय राजनीति
सैनी का मुख्यमंत्री बनना न केवल उनकी कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि भाजपा द्वारा प्रदेश के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किया गया एक रणनीतिक कदम भी माना जाता है। इस तरह से सैनी, हरियाणा के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री बने, जो विधानसभा के सदस्य नहीं थे। इससे पहले, बंसीलाल, ओमप्रकाश चौटाला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी मुख्यमंत्री बनने के बाद विधायक बने थे।

5. सियासी इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव
हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में 57 वर्षों में कई नेताओं ने मुख्यमंत्री पद संभाला है, जिनमें 10 नेताओं ने 24 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। सैनी इस लिस्ट में 11वें स्थान पर हैं, जो पिछड़े वर्ग से मुख्यमंत्री बनने वाले दूसरे नेता हैं। इससे पहले, राव बीरेंद्र सिंह ने भी मुख्यमंत्री का पद संभाला था।

6. मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद का संघर्ष
मुख्यमंत्री बनने से पहले नायब सिंह सैनी ने राजनीति में कई अहम पदों पर काम किया। वे भाजपा के युवा मोर्चा के महासचिव, जिला अध्यक्ष, और किसान मोर्चा के महासचिव रह चुके हैं। 2014 में नारायणगढ़ से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने भाजपा के लिए बड़ी जीत हासिल की, और उनकी पहचान पार्टी के एक समर्पित नेता के रूप में बनी।

7. विधायक बनने की आवश्यकता
नायब सिंह सैनी के लिए एक और चुनौती विधायक बनने की थी। हरियाणा के संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने के छह माह के भीतर विधायक बनना आवश्यक है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव से पहले उन्हें उपचुनाव जीतना होगा, ताकि वे विधायक बन सकें और राज्य विधानसभा में अपनी सीट सुनिश्चित कर सकें।

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