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गुटबाजी और संगठन के अभाव में कांग्रेस के लिए सिरसा में है संकट ही संकट -हुड्डा खेमे में कालांवाली और डबवाली के विधायक

सिरसा
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कालांवाली



-फतेहाबाद 11 अप्रैल। करीब 19 लाख 24 हजार मतदाताओं पर आधारित सिरसा की सियासी पिच सज चुकी है और यहां से ओपनर बल्लेबाज के रूप में भारतीय जनता पार्टी से डा. अशोक तंवर चुनावी मैदान में हैं। डा. तंवर विराट कोहली के अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे हैं और अभी दूसरे दलों से उम्मीदवारों को लेकर मंथन का दौर जारी है।

सियासी गलियारों में कांग्रेस से कुमारी सैलजा, चरणजीत रोड़ी, डा. सुशील इंदौरा के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा इनैलो से डा. सीताराम का नाम सबसे टॉप पर है। जजपा भागीराम, निर्मल सिंह मलड़ी पर दांव खेल सकती है। खैर उम्मीदवार आने के बाद ही सही तरह से इस सीट के समीकरणों का आंकलन किया जा सकेगा। एक बात तय है कि चुनावी प्रबंधन, संगठन, माइक्रो मैनेजमेंट के नजरिए से भाजपा का पलड़ा काफी भारी नजर आता है। वैसे भी डा. अशोक तंवर खुद ऊर्जावान नेता हैं और वे 18-18 घंटे सक्रिय रहने वाले नेताओं में से हैं। कांग्रेस के लिए स्थिति संकटदायक नजर आती है।

अहम बात यह है कि कांग्रेस के पास टीम नहीं है। अभी तक संगठन नहीं बना है। कांग्रेस की तुलना में भाजपा ने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है और डा. अशोक तंवर ने प्रचार भी शुरू कर दिया है। भाजपा के पास 30 हजार से अधिक पन्ना प्रमुखों की टीम है तो एक दर्जन से अधिक कमेटियां हैं। तमाम पदाधिकारी चुनाव मैदान में उतर गए हैं। बूथ स्तर तक कार्यकत्र्ता सक्रिय हो गए हैं। वैसे भी कांग्रेस में गुटबाजी भी एक बड़ा अवरोध है और ऐसे में यह चुनाव में भी नजर आती है तो कांग्रेस के लिए यहां की राह आसान नहीं है।

वैसे भी साल 1998 का चुनाव हारने के बाद गुटबाजी के चलते ही कुमारी सैलजा ने सिरसा की बजाय अंबाला का रुख कर लिया था। सियासी पंडित मानते हैं कि कुमारी सैलजा ने 26 साल पहले सिरसा से किनारा कर लिया जबकि डा. अशोक तंवर 2009 में सांसद बनने के बाद सिरसा में ही रहने लगे। वे पहले ऐसे सांसद भी रहे जिन्होंने सिरसा में अपना मकान बनाया।

गुटबाजी की वजह रही कि साल 2014 में सिरसा जिला में एक भी सीट पर कांग्रेस का खाता नहीं खुला और 2019 के विधानसभा चुनाव में भी सिरसा संसदीय क्षेत्र के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से कांग्रेस को केवल डबवाली व कालांवाली में ही जीत मिली। विशेष पहलू यह है कि पिछले 15 वर्षों में सिरसा में सक्रिय रहने के चलते डा. अशोक तंवर का संसदीय क्षेत्र के प्रत्येक गांव में जाना हुआ है, वे लोगों को उनके चेहरों से पहचान जाते हैं। सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस की गुटबाजी भी भी नजर आ रही है। अभी दो दिन पहले ही कुमारी सैलजा ने सिरसा पहुंची और कार्यकत्र्ताओं से फीडबैक लिया तो पूरी तस्वीर उनके सामने आ गई। दड़बा के विधायक रहे भरत सिंह बैनीवाल का सैलजा के साथ 36 का आंकड़ा है।

इसी तरह से कालांवाली के विधायक शीशपाल केहरवाला एवं डबवाली के विधायक अमित सिहाग भी हुड्डा खेमे से ताल्लुक रखते हैं। इसी तरह से डा. के.वी. सिंह, राजकुमार शर्मा, पूर्व चेयरमैन अमीर चावला, सुभाष जोधपुरिया, विशाल वर्मा जैसे नेता हुड्डा खेमे में हैं और सिरसा में ये कुमारी सैलजा के कार्यक्रम से हर बार नदारद नजर आते हैं। ऐसे में जाहिर तौर पर गुटबाजी कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। सियासी पंडित यह भी मानते हैं कि सिरसा सहित पूरे देश में मोदी का जादू आज भी बरकरार नजर आ रहा है। मोदी फैक्टर के चलते भाजपा ने प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में अपना एक निर्धारित वोट बैंक फिक्स कर लिया है।

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