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Atul Subhash ने बताया पत्नी Nikita नहाती नहीं थी,इसलिए मैं से!क्स नहीं करता था!Atul Subhash news

Atul Subhash

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377 धारा पर विवाद: पति का बयान और सामाजिक धारणा

अननेचुरल सेक्स और धारा 377

एक व्यक्ति ने अपने अनुभव साझा करते हुए धारा 377 पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके और उनकी पत्नी के बीच नेचुरल सेक्स नहीं हुआ, और इसके पीछे व्यक्तिगत कारण बताए गए। उनका दावा है कि उनकी पत्नी साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखती थीं, जिससे उनके बीच शारीरिक संबंधों में बाधा आई।

पति के आरोप: स्वच्छता और व्यवहार से असहमति

पति ने यह भी कहा कि उनकी पत्नी की स्वच्छता की आदतें असंतोषजनक थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने उनसे अस्वाभाविक और अनुचित अपेक्षाएं रखीं, जिनका पालन करना उनके लिए संभव नहीं था। इसके चलते उन्होंने कई बार शारीरिक संबंधों से बचने के लिए बहाने बनाए।

सामाजिक धारणा पर सवाल

उन्होंने कहा कि आम धारणा यह है कि पुरुष हमेशा शारीरिक संबंधों की पहल करता है, लेकिन उन्होंने इसे अपने अनुभव से खारिज किया। उनका कहना है कि पुरुषों के भी कुछ न्यूनतम मानक होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

परिवार और सुरक्षा को लेकर चिंता

पति ने अपने परिवार के प्रति चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उनके माता-पिता और भाई को उनकी पत्नी या उनके परिवार से किसी भी पब्लिक प्लेस में ही मिलना चाहिए। उन्होंने रेप केस या झूठे आरोपों की संभावना जताई और कहा कि सावधानी बरतना जरूरी है।

अंतिम इच्छाएं और न्यायिक प्रणाली पर सवाल

व्यक्ति ने अपनी अंतिम इच्छाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन तब तक नहीं किया जाए, जब तक उनके आरोपियों को सजा नहीं मिल जाती। यदि न्याय प्रणाली उन्हें न्याय नहीं दिला पाती, तो उन्होंने अपनी अस्थियों को कोर्ट के बाहर गटर में बहा देने की बात कही।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज

उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की जांच की मांग की, यह कहते हुए कि भ्रष्टाचार के मामले अक्सर सामने आते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।

न्याय के लिए दरख्वास्त

अंत में, उन्होंने न्यायपालिका से अपील की कि उनके परिवार को झूठे मामलों में न फंसाया जाए और उन्हें मानसिक और कानूनी रूप से परेशान न किया जाए।

निष्कर्ष
यह बयान सामाजिक और न्यायिक मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। व्यक्ति ने अपनी आपबीती के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत संघर्ष साझा किए, बल्कि व्यापक सामाजिक और न्यायिक समस्याओं को उजागर किया है।

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