लाखी जंगल का ऐतिहासिक महत्व: डा. विजयंत जोशी भारतीय इतिहास संकलन समिति हरियाणा शाखा जिला सिरसा ने करवाई गोष्ठी
Historical importance of Lakhi forest: Dr. Vijayant Joshi Indian History Compilation Committee, Haryana Branch, District Sirsa organized a seminar.
सिरसा।
लाखी जंगल सिंधु नदी से आरंभ होकर बीकानेर से दिल्ली के मध्य वर्तमान सडक़ मार्ग जो बीकानेर से डुंगरगढ़, सरदारशहर, भालेरी, तारानगर एवं सादुलपुर होकर दिल्ली की तरफ चला जाता है,
तक अपने विस्तार को बनाए हुआ था। जो कभी वाहिक प्रदेश के नाम से जाना जाता था। उक्त ऐतिहासिक महत्व की जानकारी प्रो. डा. विजयंत जोशी, प्रवक्ता राजनीति विज्ञान डीएवी स्कूल सिरसा ने
मंगलवार को भारतीय इतिहास संकलन समिति हरियाणा शाखा जिला सिरसा की ओर से स्थानीय विवेकानंद स्कूल के सभागाार में मासिक गोष्ठी में बोलते हुए दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति
सिरसा के जिलाध्यक्ष सुभाष शर्मा व सान्निध्य प्रांत उपाध्यक्ष रामसिंह यादव का रहा। जबकि मुख्यातिथि के रूप में राजकीय माध्यमिक विद्यालय गुडियाखेड़ा के प्राचार्य उमेद सिंह ढाका रहे। जोशी ने
विस्तार से लाखी जंगल के बारे में बताया। डा. जोशी ने आगे बताया कि सिरसा शहर के भौगोलिक परिवेश के अन्तर्गत जरनैली मार्ग एवं हजार से अधिक वर्षों से इस क्षेत्र में फैले लाखी जंगल के बारे में
जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब हम किसी क्षेत्र के इतिहास पर चर्चा करते हैं तो हमें उस क्षेत्र के भूगोल के बारे में विस्तृत जानकारी होनी आवश्यक होती है। भूगोल की जानकारी के कारण उस
क्षेत्र के इतिहास के बारे में जानने में हमें सरलता के साथ-साथ इतिहास के उन पहलुओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त होती है, जो जनमानस में आज भी अछूते हैं। पंजाब जो कभी वाहिक प्रदेश के नाम
से जाना जाता था, अमृतसर से लेकर सरहिन्द तक इसी में समाहित था। वर्तमान भटिन्डा, भटनेर जिसे आज हनुमानगढ़ के नाम से जाना जाता है। साथ ही जरनैली मार्ग पर उनके द्वारा बताये गये
सारगर्भित तथ्यों से उपस्थितजनों को एक नये पहलु से अवगत कराया एवं ऐतिहासिक पुस्तकों एवं अपनी यात्राओं के दौरान हुए अनुभवों को संयोजित करते हुए सिरसा शहर को जानने के लिए एक
दृष्टिकोण प्रदान किया। समिति के उपप्रधान गंगाधर वर्मा ने गोष्ठी में आए लोगों का धन्यवाद किया। गोष्ठी में समिति के कोषाध्यक्ष जयंत शर्मा, भारत विकास परिषद के पूर्व प्रधान रमेश जींदगर,
सुरेंद्र बांसल, सचिव सूर्यप्रकाश, सुभाष बजाज, कमल किशोर अरोड़ा, सूरत सिंह यादव, कृष्णकांत सिंगला, सुभाष वर्मा, सुरेंद्र जोशी, महावीर प्रसाद अग्रवाल, गुरबक्श खुराना, सहित अन्य
गणमान्य लोग उपस्थित थे। गोष्ठी
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