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सरकार ने नहीं बदला किसानों के प्रति रवैया तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा: एसकेएम (गैर राजनीतिक)

एसकेएम (गैर राजनीतिक)
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सरकार ने नहीं बदला किसानों के प्रति रवैया तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा: एसकेएम (गैर राजनीतिक)


सिरसा। सिरसा से बीकेई अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया कि एसकेएम (गैर-राजनीतिक) ने बेंगलुरु के प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें कर्नाटक से किसान नेता कुरबरू शांताकुमार, पंजाब से जगजीत सिंह डल्लेवाल, सुखजीत सिंह, हरियाणा से अभिमन्यु कोहड़, लखविंदर सिंह औलख, जफर खान, तमिलनाडु से पीआर पांडियन, केरल से केवी बीजू मौजूद रहे। किसान नेता जगजीत सिंह डलेवाल ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य गारंटी कानून के लिए हमारा धरना 13 फरवरी से 4 जगहों पर चल रहा है और हजारों किसान 135 दिनों से अधिक समय से सडक़ों पर डेरा डाले हुए हैं।

उन्होंने कहा कि यह धरना जब तक केंद्र सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं कर देती, तब तक जारी रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीजेपी सरकार 2019 के चुनावों की तुलना में इस बार चुनाव में 71 से अधिक लोकसभा सीटें हार चुकी है। अगर बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने अपनी किसान विरोधी नीतियों को नहीं बदला तो किसानों का सामना करना होगा। आगामी विधानसभा चुनाव में हरियाणा, महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों में किसानों में बीजेपी के प्रति गुस्सा है। कुरबरू शांताकुमार ने कहा कि 8 जुलाई को एसकेएम (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा 240 बीजेपी सांसदों के अलावा सभी सांसदों को अपनी 12 मांगों को लेकर ज्ञापन देंगे। उन्होंने कहा कि जुलाई माह में दोनों मोर्चों द्वारा दिल्ली में किसान सम्मेलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चल रहे आंदोलन को मजबूत करने के लिए 24 जून को शिवमोगा में एक विशाल किसान सम्मेलन का आयोजन किया था।

लखविंदर सिंह औलख ने कहा कि एसकेएम (गैर-राजनीतिक) सितंबर में हरियाणा में एक किसान रैली का आयोजन कर रहा है, जिसमें सभी राज्यों के 1 लाख से अधिक किसान भाग लेंगे, ताकि वर्तमान एनडीए सरकार पर किसानों के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनाने का दबाव बनाया जा सके। किसान नेताओं ने आगे कहा कि फरवरी में केंद्र सरकार के साथ 4 दौर की बातचीत में उन्होंने मजबूत मसाला बोर्ड के गठन, नारियल और गन्ना किसानों के लिए सी2+50 प्रतिशत फॉर्मूला जैसे दक्षिण भारतीय किसानों से संबंधित मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया था। एसकेएम (गैर-राजनीतिक) देश भर में कृषक समुदाय की एकता को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।

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